A.K.BHAKTI
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12 hours ago
एक बार सभी ग्रहों के बीच यह विवाद हो गया कि सबसे शक्तिशाली कौन है। तब देवताओं ने न्याय के लिए महान राजा विक्रमादित्य के पास जाने का निर्णय लिया। राजा विक्रमादित्य ने सभी ग्रहों के लिए अलग-अलग धातुओं के सिंहासन बनवाए— सोने, चाँदी, ताँबे, लोहे आदि के। जब ग्रहों को बैठाया गया तो शनि देव को लोहे के सिंहासन पर बैठाया गया, जो सबसे पीछे था। यह देखकर शनि देव क्रोधित हो गए। उन्होंने कहा — “राजन! तुमने मेरा अपमान किया है। समय आने पर तुम्हें मेरे प्रभाव का अनुभव होगा।” कुछ समय बाद शनि की साढ़ेसाती राजा विक्रमादित्य पर आ गई। राजा को अपना राज्य छोड़ना पड़ा, कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, यहाँ तक कि उन्हें बहुत कष्ट सहने पड़े। लेकिन राजा ने धैर्य, सत्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ा। कुछ समय बाद जब शनि देव का प्रभाव समाप्त हुआ, तो शनि देव स्वयं प्रकट हुए और बोले: “राजन, तुमने कठिन समय में भी धर्म नहीं छोड़ा। इसलिए मैं तुमसे प्रसन्न हूँ।” फिर उन्होंने राजा विक्रमादित्य को उनका राज्य और सम्मान वापस दिला दिया। तभी से कहा जाता है — शनि देव दंड जरूर देते हैं, लेकिन न्याय के साथ देते हैं। जो सच्चा और धर्मपरायण होता है, उसे अंत में शनि देव का आशीर्वाद अवश्य मिलता है। 🙏 जय शनि #jay shanidev Maharaj ki jay 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 देव 🪔 शुभ शनिवार