Mukesh Sharma
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1 days ago
झुकना बुरा नहीं है। लेकिन समानता से झुकना ही प्रेम है। डर से झुकना — दासता है। आस्था से झुकना — आत्महत्या है। झुको पेड़ के सामने, पशु के सामने, वनस्पति के सामने, पहाड़, नदी, हवा, आकाश के सामने — क्योंकि ये पवित्र हैं। लेकिन इंसान? जब तक देह में है, देह है। और देह में वासना होगी ही। अगर कोई कहे कि गुरु में वासना नहीं — तो वही सबसे बड़ा झूठ है। जिसमें वासना नहीं, वह गुरु बनने ही नहीं निकलेगा। और जो सच में वासना से परे होंगे, वे तुम्हें पागल दिखाई देंगे। उनका कोई रूप नहीं होगा, कोई रौब नहीं होगा, कोई आकार नहीं होगा। वे सत्य के वृक्ष की तरह होंगे — जो चाहे, उनकी छाया में बैठ जाए। वे बुलाते नहीं। वे मांगते नहीं। वे शिष्य नहीं बनाते। जो खींचे जाते हैं, वे खुद आते हैं। जो गुरु तुम्हें बुला रहा है, वह लोभी है। जो तुम्हें बांध रहा है, वह लालसा है। जहाँ श्रद्धा के नाम पर तुम्हें छोटा किया जा रहा है, वहाँ सत्य नहीं — व्यापार है।🏄‍♂️ #📒 मेरी डायरी #☝अनमोल ज्ञान #🙏सुविचार📿 #👫 हमारी ज़िन्दगी #☝ मेरे विचार