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अनजाने ही पूछ लिया,
जो दिल-ए-हाल तुमने।
दिल के चौराहे पे........
कसम से कंगाल हो गए हम।
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जो फिसल गए कभी तो कोई बात नही,
जो दिल में उतर गए गुनहगार हो गए।।
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लब करें गुफ्तगूं और नजरें सवाल करें,
खामोश इश्क एक-दूजे को बेहाल करे।
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सरसराते हुए बदन को छू गई फिर से,
बमुश्किल ही सम्भाल पाए यूँ खुदको!
बेलगाम दिल तब सम्भलता नही,
ऐ दिल बता फिर धड़कन की रजा क्या है?
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तू लिखे तो गजल हम लिखें तो बवाल है,
जिंदगी तेरे कलम के भी नखरे हजार हैं!
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खुद से हीे रूठे खुद कोे ही मनाए,
बदमाश ये दिल यूँ चूपके से मुस्कुराए!
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तुम्हारा ये लब्ज-ए-इलजाम,
दिल न संभले जान भी ले ले।
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ठंढ लग गई कलेजे में समझ नही आता,
वफ़ा-ए-इश्क की एकमुश्त दवा क्या है।
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बस वो इस तरफ ही यूँ निगाह कर गए,
सिर्फ इश्क करके ही हमे तबाह कर गए।💕💞
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..........✍ रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💝 शायराना इश्क़ #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️