🎨सच्ची होली बाहरी रंगों में नहीं, बल्कि परमात्मा की भक्ति के आध्यात्मिक रंग में रंग जाने का नाम है।
संत गरीबदास जी महाराज की अमृतमयी वाणी
ध्रु प्रहलाद जहां खेलहीं रंग होरी हो, नारद का उपदेश राम रंग होरी हो।
हाथ पिचकारी प्रेम की रंग होरी हो, खेलत हैं हमेश राम रंग होरी हो।।
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