"सिलेंडर"
एक आदमी
राजनीति की आग लगता है
एक आदमी अपना चूल्हा जलाता है
एक तीसरा आदमी भी है
जो न आग लगाता है, न चूल्हा जलाता है
वह सिर्फ़ चूल्हे से खेलता है
मैं पूछता हूँ—
‘यह तीसरा आदमी कौन है?’
मेरे देश की संसद मौन है।
(स्व धूमिल से क्षमा मांगते हुए)
© विजय नगरकर
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