#तत्वज्ञान संदेश
#अपने_वास्तविक_मददगार_को_पहचानें...
कबीर साहेब कहते हैं कि
मैं रोवंत हुं सृष्टि को,ये सृष्टि रोवै मोहि *
गरीबदास इस वियोग को,समझ सकै नहीं कोई **
गरीब,कल्पै कारण कौन हैं,कर सेवा निष्काम *
मन इच्छा फल दुंगा,जै पड़े मेरे से काम **
देव दूर्लभ अपने अनमोल मानव जीवन को सुखमय बनाने के मूल मंत्र को जानने के लिए अवश्य पढ़ें
पुस्तक #ज्ञानगंगा
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