#✍️ विचार #✍️सुविचार #☺️उच्च विचार #☺चांगले विचार
✿•┅━꧁🌹सुप्रभात 🌹꧂━┅•✿
✿ गुरुवार दि. २६ फेब्रुवारी २०२६✿
✿ फाल्गुन शु. दशमी १९४७ ✿
✿ विक्रम सवत्सर २०८२✿
✿शिवशक ३५२✿
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*ஜ۩۞۩ संस्कृत सुभाषितमाला ۩۞۩ஜ*
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एकं हन्यान्न वा हन्यादिषुर्मुत्तक्ताह्य धनुष्मता।
बुद्धिर्बुद्धिमतोत्सृष्टा हन्याद् राष्ट्रं सराकम्।।
कोई धनुर्धर जब बाण छोड़ता है तो हो सकता है कि वह बाण किसी को मार दे या न भी मारे, लेकिन जब एक बुद्धिमान कोई गलत निर्णय लेता है तो उससे राजा सहित संपूर्ण राष्ट्र का विनाश हो सकता है।
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