Sagar Singh
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11 days ago
विचार भावना मन बुद्धि चित्त अहंकार से जो कुछ मान्यताएं संकल्प दृष्टिकोण अनुभव किया जाता है वह है समझ और शरीर बल्ब है तो अंत: करण= मन बुद्धि चित्त अहंकार को फिलामेंट यानि एक तार जिससे बल्ब चमकता है और सारे मनुष्यों जीवों प्राणियों के शरीर बल्ब है अंत: करण फिलामेंट है तथा जिसके कारण बल्ब जल रहें हैं वह पावरहाउस है परमात्मा ब्रह्माण्ड की ईश्वरीय परमसत्ता से कनेक्शन वायर सर्विस है- सांसे आक्सीजन का आवागमन पंचमहाभूत कनेक्शन टुटा और बल्ब की बत्ती गुल यानी प्राकृतिक मृत्यु लेकिन यदि बेमोत मरे आत्महत्या की तो फिर बल्ब का फिलामेंट उड़ गया अब वो फिर से दौबारा नहीं जलेगा और मनुष्य नहीं बनेगा भूत प्रेत योनि में सर्प आदि योनि में प्रवेश करेगा यदि जहर खाकर मरेगा तो फिर छिपकली सांप बिच्छू आदि जहरीले जंतु बनेगा 🙏🏻 #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🙏गीता ज्ञान🛕 #✍️ जीवन में बदलाव #Suvichar