संत कबीरदास जी अनुयाई ।
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#❤️जीवन की सीख : #🙏सुविचार📿 : #✍️ जीवन में बदलाव : --- धार्मिक आदेश : ( मैं धार्मिक पंथ – भक्ति पंथ से जुड़ा हुआ व्यक्ति हूं ) ( भारत देश में हम सब भारतीय धार्मिक इंसान ही है । ऐसा हम सब का मानना है । धर्म का पालन करना ही हमारे जीवन का उद्देश्य है । ऐसा हमारी मान्यता है । अगर ऐसी ही बात है तो । तो मेरी बात मानना भी एक धार्मिक आदेश ही है । ) --- आज्ञा न मानना एक पाप है। आइए इसे समझते हैं। अगर किसी ने हमें कोई काम न करने को कहा है, तो हमें उसी समय वह काम बंद कर देना चाहिए। कोई सवाल नहीं करना चाहिए। अगर एक भी व्यक्ति कह दे कि यह काम अच्छा नहीं है और इसे रोक देना चाहिए, तो हमें उसे फिर कभी नहीं करना चाहिए। यही अनुशासन और आज्ञाकारिता कहलाती है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि हम कहें – “मुझे रुकना नहीं है।” अगर कोई बड़ा कहता है कि यह काम नहीं करना चाहिए, तो इसका मतलब है कि उस काम से किसी को चोट, दुख या नुकसान हो सकता है। किसी को दुख देना, किसी को नुकसान पहुँचाना, या कोई बुरा काम करना – यह सब बुराई है। हमें बुराई का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। हमें कभी भी बुरा काम नहीं करना चाहिए। हमारे बड़े हमेशा हमारे भले के लिए ही समझाते हैं। वे चाहते हैं कि हम सुरक्षित रहें और दूसरे लोग भी सुरक्षित रहें। बड़ों की बात को गंभीरता से लेना चाहिए। उसे ऐसा समझना चाहिए जैसे वह बहुत ज़रूरी आदेश हो। इसलिए बड़ों की आज्ञा मानना बहुत ज़रूरी है। इसमें कोई छूट नहीं होनी चाहिए। यह सब सभी की सुरक्षा के लिए किया जाता है। अगर कोई आज्ञा नहीं मानेगा, तो उसे बाद में बिना मार-पीट के सज़ा दी जाएगी। इसलिए हमेशा आज्ञाकारी रहना ही बेहतर है। हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए। ---