M P SINGH
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बीच में बैठीं भानु-दुलारी चहुँ ओर सखियाँ हैं प्यारी जैसे चंदा के संग चमके तारों की टोली कोउ सँवारे केश कोई इत्र लगावें कोउ प्रेम सौ मीठे गीत सुनावें कोउ रिझावे श्यामा जू को सखी ललिता जू मान सिखावें विशाखा अपनी वाणी सौ रसामृत बरसावें चम्पकलता दिव्य पकवान बनावें प्यारी जू को भोग लगावें सखी चित्रा प्रियप्रीतम कौ अति सुंदर चित्र बनावें तुंगविद्या संगीत की ज्ञाता वीणा सुमधुर बजावें इन्दुलेखा करें नीति की बातें सबको प्रेम करनो सिखावें रंगदेवी चंदन को लेप करें देह को महकावें और सुदेवी जल सेवा कर शीतल सुख पहुंचात इन अष्ट सखियों की स्वामिनी राधा और राधा के वश में हैं श्याम अष्टसखी के मण्डल में ही नित सजते हैं चारों धाम सखियों संग निकुंज मैं श्री राधे नित रास रचात देख छटा अद्भुत उनकी देवों की आंखें हैं थक जाती बिना सखी की कृपा मिले ना मिलता कृष्ण का प्रेम सखी इन सखियों की सेवा का ही फल 'राधा-कृष्ण' का नाम है राधे राधे ❣️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️