HARESH CHUDASAMA
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सारी हद पार कर तूने फिर से अपनी आँखों को भिगोया है, वफ़ा की चादर को फाड़कर तूने फरेब का ही बीज बोया है, ये आँसू नहीं, ये तो तेरी नफरत का बहता हुआ काला पानी है, तूने तो अपनी सिसकियों में मेरे सुकून का जनाज़ा संजोया है, दिखावे की इस तड़प से तू किसे गुमराह करने की कोशिश में है, मदद की आड़ लेकर तूने सिर्फ़ अपने ही स्वार्थ को पिरोया है, तेरी हर एक आह मेरे टूटे हुए भरोसे का सरेआम मज़ाक उड़ाती है, तूने तो मासूम बनकर जाने कितने ही लोगों का विश्वास खोया है, अदाकारी की इस महफ़िल में तेरा किरदार सबसे ज़हरीला निकला, जिसने भी तुझ पर यकीन किया, उसने रातों का चैन खोया है, अब न पिघलेगा ये पत्थर, चाहे तू आँखों से लहू ही बहा दे, क्योंकि तूने ही अपने हाथों से वफ़ा का पवित्र रिश्ता धोया है, खामोश हो जा अब, कि तेरी ये आवाज़ रूह को छलनी करती है, तूने तो रो-रोकर सिर्फ़ नफरत के साये में मुझे ही डुबोया है... 🦋⃟≛⃝🇩 𝖎 𝖓 𝖚 ≛⃝🥀࿐...... #👌 બેસ્ટ ફ્રેન્ડ #💖 રોમેન્ટિક સ્ટેટ્સ #💓 લવ સ્ટેટ્સ #🤝 દોસ્તી શાયરી #💘 પ્રેમ 💘