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📜 मुद्दा बी.एन. राव VS अंबेडकर का नहीं है... असली बात कुछ और है। असल में मुद्दा बी.एन. राव का है ही नहीं... मुद्दा तो यह है कि किसी भी तरह यह साबित किया जाए कि 👉 भारत का संविधान डॉ. भीमराव अंबेडकर ने नहीं लिखा। पहले कहा गया — “संविधान नेहरू ने लिखा।” फिर कहा गया — “राजेंद्र प्रसाद ने लिखा।” कभी टी.टी. कृष्णचारी का नाम उछाला गया, फिर कहा गया — “संविधान तो संविधान सभा ने मिलकर लिखा है।” जब ये सब दलीलें नहीं चलीं, तो कहा गया — “अंबेडकर ने तो अंग्रेज़ों का संविधान कॉपी किया।” वह भी तर्क धराशायी हो गया। फिर नया नाम आया — प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा (जिन्होंने संविधान को हाथ से लिखा था) कहा गया — वही “वास्तविक लेखक” हैं! मगर वो भी चाल ज़्यादा देर नहीं चली। अब नया नाम — बी.एन. राव! और कहा जा रहा है — “असल निर्माता वही थे।” 💥 लेकिन सच्चाई यह है — मुद्दा बी.एन. राव का नहीं है, मुद्दा यह है कि कुछ लोगों को यह हज़म ही नहीं होता कि भारत का संविधान एक दलित ने बनाया। उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि संविधान किसने बनाया, बस “अंबेडकर” नाम हटाना है! अगर ज़रूरत पड़ी तो वे किसी जानवर को भी “संविधान निर्माता” घोषित कर देंगे, पर डॉ. अंबेडकर को मान्यता देने में तकलीफ़ होगी। यह वही मानसिकता है जो सदियों से समानता और न्याय की राह में बाधा रही है #☸️जय भीम #🔎लेटेस्ट आंतरराष्ट्रीय अपडेट्स✌ #🏛️राजकारण #🎭Whatsapp status #😍Marathi Status King — 👉 मनुवादी सोच, जो बराबरी से डरती है। 🔥 पर सच्चाई यह है — भारत का संविधान केवल लिखा नहीं गया था, बल्कि एक युग परिवर्तन की घोषणा थी, और वह घोषणा डॉ. भीमराव अंबेडकर ने की थी। 💙 अंबेडकर क्रांति हैं, और उस क्रांति से मनुवादी आज भी डरते हैं। ✍️ Vishnu Hallu