J.M.D.161261
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*🔸 श्लोक:* ```यत्र यत्र रघुनाथ कीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकाञ्जलिम्। बाष्पवारि परिपूर्ण लोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम्॥``` *🔹 अर्थ:* *जहाँ-जहाँ श्रीराम का कीर्तन होता है, वहाँ-वहाँ हाथ जोड़कर और आँखों में आँसू लिए हनुमान जी उपस्थित रहते हैं। ऐसे राक्षसों का नाश करने वाले पवनपुत्र हनुमान को प्रणाम है।* *🚩- 𝄟ꕥ❥︎ ॐ हं हनुमते नमः ❥︎ꕥ𝄟 -🚩* ~- 𓂃°°𓆩🌸⃝🙏⃝🌺⃝🛕𓆪°°𓂃 - #🌅 भक्ति