sn vyas
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#मां दुर्गा 🙏 सप्तश्लोकी दुर्गा — कलियुग की सिद्ध, संक्षिप्त और अत्यंत प्रभावशाली स्तुति 🙏 जब साधक के पास समय कम हो, मन व्याकुल हो और जीवन में बाधाएँ एक साथ घेर लें, तब सप्तश्लोकी दुर्गा एक ऐसा दिव्य उपाय है, जो बहुत थोड़े पाठ में पूर्ण फल प्रदान करता है। यह केवल स्तुति नहीं, महामाया से सीधा संवाद है। --- 🔱 सप्तश्लोकी दुर्गा का विशेष महत्व यह स्तोत्र स्वयं भगवान शिव और माता के संवाद से प्रकट हुआ है। कलियुग में साधना की जटिलताओं को देखते हुए माँ ने इसे “सर्वेष्टसाधनम्” कहा है। ✨ यह पाठ विशेष रूप से प्रभावी है जब— भय, मानसिक अस्थिरता या अनजानी चिंता बनी रहती हो रोग, दरिद्रता या बार-बार बाधाएँ आ रही हों निर्णय शक्ति कमजोर हो गई हो साधना में समय कम लेकिन श्रद्धा पूर्ण हो सात श्लोकों में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों शक्तियाँ जागृत होती हैं। इसी कारण यह पाठ रक्षा, समृद्धि और ज्ञान तीनों का संतुलित साधन है। --- 📿 पाठ करने का सबसे प्रभावशाली और शास्त्रसम्मत तरीका 🔸 दिन: मंगलवार, शुक्रवार या नवरात्रि विशेष फलदायी 🔸 समय: प्रातः ब्रह्ममुहूर्त या रात्रि में सोने से पूर्व 🔸 स्थान: शांत, स्वच्छ स्थान; पूर्व या उत्तर मुख होकर बैठें विधि 1️⃣ पहले माँ दुर्गा का स्मरण करें 2️⃣ दीपक जलाकर लाल या सफेद पुष्प अर्पित करें 3️⃣ नीचे दिए गए संपूर्ण पाठ को अखंड और शुद्ध उच्चारण के साथ पढ़ें 4️⃣ अंत में मौन होकर 1–2 मिनट माँ का ध्यान करें 📌 विशेष ध्यान पाठ के बीच रुकावट न करें मोबाइल, बातचीत और जल्दबाज़ी से बचें श्रद्धा और स्थिरता ही इसकी सबसे बड़ी कुंजी है --- 🌺 सप्तश्लोकी दुर्गा (संपूर्ण पाठ – यथावत) शिव उवाच । देवी त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनि । कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः ॥ देव्युवाच । शृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम् । मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते ॥ अस्य श्री दुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्री महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वत्यो देवताः, श्री दुर्गा प्रीत्यर्थं सप्तश्लोकी दुर्गापाठे विनियोगः । ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा । बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥ १ ॥ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि । दारिद्र्यदुःख भयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्र चित्ता ॥ २ ॥ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ३ ॥ शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ४ ॥ सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते । भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥ ५ ॥ रोगानशेषानपहंसि तुष्टा- रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् । त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥ ६ ॥ सर्वबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि । एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरि विनाशनम् ॥ ७ ॥ इति श्री दुर्गा सप्तश्लोकी । --- 🌼 भावार्थ में निष्कर्ष जो माँ को स्मरण करता है, उसका भय नष्ट होता है। जो माँ की शरण आता है, वह कभी अकेला नहीं रहता। सप्तश्लोकी दुर्गा — कम शब्दों में पूर्ण कृपा।--- ✨ जय माँ दुर्गा ✨