"गुलनाड़"
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वो आई सड़ककर पास भी,
पर मुस्कुराई और गुजर गई....
हम सोचते रहे अब बात बनी और,
उसने पूछा ही लिया अब चाल कैसा है?
नाजुक सी हरएक कशिश,
और मन पागल हुए बैठे...
खूबसूरत से कली गुलजार रहे,
बस समझ न आया ये सवाल कैसा हैं?
गुलाबी मौशम में दिखने लगे,
खिलते हुए चमेली के फूल...
धड़कन धकधक करते रफ्तार में रहे,
आखिर ये जज्बाती ख्याल कैसा है?
जो मिल जाओ तो भी बेहाल,
और न मिलो तो भी बेहाल...
बदमाश हुआ ये दिल नासमझ,
आखिर पगले ये मलाल कैसा है?
साँझ के आड़े छुपी हुई हर भोर,
आसमान के उड़ते हुए परिंदे...
अनायास बड़बस ही पूछ बैठे,
सच-सच बताओ ये कमाल कैसा है?
बीते पतझर बारिस भी बीते,
गुजरती रही ठंढी सरद सलोनी...
पूरा नही तो कोई कुछ ही बता दे,
मौशम में फैलता ये गुलाल कैसा है?
टपकते आंखों के नूर चढ़े सर पे,
मन दौड़कर फिर दिल से पूछे....
गुड़ कुछ पिघले भी मीठे हुए,
ये बीतता हुआ साल-दर-साल कैसा है?
ख्वाबो के बारिश ख्वाबो में हुए,
फिर वही टूट गई कमसिन नींद....
पगली फिर खिलखिलाई जोरों से,
बताओ साहेब दिल का हाल कैसा है?
और बताओ....
साहेब दिल का अब हाल कैसा है?💕💞
........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳🌳
#🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💝 शायराना इश्क़ #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️