sandeep
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##जा _दिन_सतगुरु_भेंटिया कबीर परमात्मा सन् 1727 में गरीबदास जी को मिले व अपने यथार्थ ज्ञान से व यथार्थ स्थान (सतलोक) से परिचित करवाया। इसके बाद गरीबदास जी ने उस पूर्ण परमात्मा की तथा सतलोक की वास्तविक जानकारी को अपने मुख कमल से उच्चारण किया था, जिसका लेखन दादू पंथ से दीक्षित संत गोपालदास जी ने किया गया था। और सर्व मानव समाज को एक ऐसा अनमोल ग्रंथ दिया जिसे आज सद्ग्रन्थ साहिब के नाम से जाना जाता है। ⚡️गरीबदास जी बचपन से ही अन्य ग्वालों के साथ गौ चराने जाते थे। कबलाना गाँव की सीमा से सटे नला खेत में 10 वर्ष के बालक गरीबदास जी जांडी के पेड़ के नीचे प्रातः 10 बजे 1727 में अन्य ग्वालों के साथ जब भोजन कर रहे थे तभी वहाँ से कुछ दूरी पर सत्यपुरुष कबीर साहेब जिंदा महात्मा के रूप में सतलोक से अवतरित हुए और गरीबदाज जी महाराज से मिले।