#✍️अनकही दिल की बात
किसी शायर ने मौत पर क्या खूब लिखा है-
जिंदगी में दो मिनट कोई मेरे पास ना बैठा आज सब मेरे पास बैठे जा रहे हैं
कोई तौफा ना मिला आज तक इज फूल ही फूल दिये जा रहे हैं
दो कदम साथ चलने को तैयार ना था कोई और आज काफ़िला बन साथ चले जा रहे थे
तरस गए थे हम किसी एक हाथ के लिए और आज कंधे से कंधे दिए जा रहे हैं
आज पता चला कि मौत कितनी हसीन होती है कम्बख्त हम तो यूही जिंदगी जिये जा रहे थे।