समीक्षा की समीक्षा - भ्रमित हिन्दुओं का भयावह भविष्य
इस लेख को पढ़ने की पहली शर्त यही है कि आप अपने आवरण को उतार कर अलग रखें और केवल एक व्यक्ति होकर सोचें , एक हिंदू होकर अपने भविष्य का चिंतन करें ।
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हाल के ही चार बयानों पर चर्चा करते हैं ।
1. भारत में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू ही है ।
2. भारत में चार तरह के हिन्दू हैं । कुछ गर्व से कहते हैं हम हिन्दू हैं , कुछ कहते हैं" गर्व की क्या बात ", कुछ धीरे से कहते हैं 'हम हिन्दू हैं ', कुछ भूल गए हैं कि वो हिन्दू हैं ।
3. भारत आने वाले तीस वर्ष में हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा
4. भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की कोई आवश्यकता नहीं क्योंकि ये हिन्दू राष्ट्र ही है ।
यह चारों बयान अपने आप में कितने भ्रमित करने वाले हैं या और स्पष्ट तरीके से कहूं कि इन बयानों को देने वाला व्यक्ति स्वयं भ्रमित है ।
यदि भारत में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है तो फिर आपको एकांत में चिंतन करने की आवश्यकता है क्योंकि आपके लिए तो मार्गदर्शक मण्डल वाला ऑप्शन भी नहीं है ।
जब 1920 के दशक में खिलाफत मुहिम और असहयोग आंदोलन आरम्भ हुआ और मुस्लिम दंगे शुरू हुए तब पूज्य हेडगेवार जी ने हिंदू समाज की दुर्दशा को देखा और इसके कारणों को समझा, कारण तब भी लगभग वही थे जो आज हैं ..जैसे
कांग्रेस का मुस्लिम चरमपंथ को समर्थन, गांधी की हिन्दू मुस्लिम एकता के धोखे के पीछे हिन्दुओं के हितों की अनदेखी
हिन्दुओं में संगठन की कमी, आत्मविश्वास की कमी, बल और अनुशासन की कमी ।
जब हिंदू समाज कमजोर पड़ रहा था और कांग्रेस हिंदू मुस्लिम एकता के धोखे के पीछे हिंदुओं का ही नाश करने पर तत्पर थी तब पूज्य हेडगेवार जी ने संकल्प लिया कि वह एक ऐसा संगठन बनाएंगे जो हिंदुओं को संगठित करेगा, हिंदुओं को अनुशासित रखेगा, हिंदुओं में आत्मविश्वास जगाएगा और हिंदुओं को बलिष्ठ बनाएगा, बलवान बनाएगा ताकि हिन्दू अपनी रक्षा स्वयं कर सकें ।
तो प्रश्न है कि हिंदू किन से अपनी रक्षा कर सकें तो इसका उत्तर है उन्हीं से जिन्हें आज मोहन भागवत स्वयं हिंदू बता रहे हैं ।
कोई भी संगठन जब बनता है तो उसके लक्ष्य निश्चित किए जाते हैं, उसके उद्देश्य निश्चित किए जाते हैं तो यह तो हो सकता है कि कार्य करने के तरीकों में बदलाव हो, लक्ष्य तक पहुंचने के रास्ते के चुनाव में कई लोग हों, तो हो सकता है कि रास्ते अलग-अलग हो किंतु रास्तों के बदले जाने से लोगों के बदल जाने से, समूह के मुखिया के बदले जाने से कभी भी लक्ष्य नहीं बदलता, और जिस दिन आपने अपना निश्चित किया हुआ लक्ष्य बदल दिया तो आप वह रहे ही नहीं और जब आप वह रहे ही नहीं तो आपको वह सम्मान भी नहीं मिलना चाहिए जो तब मिल रहा था जब आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पित थे ।
भारत में चार तरह के हिंदू नहीं है भारत में केवल एक तरीके का हिंदू है जो कहता है कि गर्व से कहो हम हिंदू हैं और वह सिर्फ कहता ही नहीं है वह कहता तब है जब वह इसको मानता है और जब वह यह बात कहता है तो उसकी धमनियों का रक्त संकल्पित होता है कि इस राष्ट्र की रक्षा करने के लिए यदि उसे अपने प्राणों की आहुति भी देनी होगी तो भी वह एक क्षण के लिए चिंतन नहीं करेगा, बाकी के तीन तरह के हिंदू केवल उस हिंदू की टांग खींचने की चेष्टा में लगे हैं, उसको अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचने देना चाहते, उसकी राह में बाधा उत्पन्न करने के लिए हैं ।
यदि भारत में सभी हिंदू हैं तो फिर आप घर वापसी किनकी करवाना चाहते हैं फिर आपका लव जिहाद की बात करना तो केवल दोगलापन ही कहा जाएगा ।
यदि भारत में सब हिंदू ही हैं तो मैं आपके इस कथन से पूरी तरह सहमत हूं कि भारत अगले 30 वर्षों में हिंदू राष्ट्र बन जाएगा जानते हैं क्यों क्योंकि यही बात तो मुस्लिम कह रहे हैं कि अगले 30 वर्षों में गजवा ए हिंद हो जाएगा और जब आप सबको ही हिंदू मान रहे हैं तो फिर चाहे यह मुस्लिम राष्ट्र बने या सनातनी राष्ट्र आपके लिए तो हिंदू राष्ट्र ही रहेगा ।
मैं कहूं कि जो उद्देश्य,उसका लक्ष्य, उसकी आत्मा होती है वह यह होता है कि आपको अपने लक्ष्य प्राप्ति में या अपने लक्ष्य के प्रति या अपने लक्ष्य को लेकर कभी भी भ्रमित नहीं होना चाहिए । जैसे कि :
वीर की तो आयु होती मात्र कुछ क्षण
पार्थ अब गांडीव से टंकार कर लो
द्वंद्व में जीते नहीं जाते कभी रण
हो भ्रमित तो हार को स्वीकार कर लो
तो लक्ष्य क्या है गुरु गोलवलकर जी ने कहा था कि हमें अपने राष्ट्र को तीन राक्षसों से बचाना है मेरे विचार से संघ का हर स्वयंसेवक जानता ही होगा कि वह तीनों कौन हैं ।
भीष्म पितामह बलवान थे पर वह सम्मानित नहीं रहे क्योंकि वह अपने धर्म को भूल गए ।
द्रोणाचार्य बुद्धिमान थे गुरु थे किंतु वह सम्मानित नहीं हो सके क्योंकि वह अपने धर्म को भूल गए ।
कृपाचार्य श्रेष्ठ थे विद्वान थे किंतु वह सम्मान प्राप्त नहीं कर सके क्योंकि वह अपने धर्म को भूल गए ।
कर्ण बलवान था किंतु वह सम्मानित नहीं हो पाया क्योंकि वह अपने धर्म को भूल गया ।
और जानते हैं सबका धर्म क्या था ?
सबका धर्म केवल एक ही था धर्म की रक्षा करना ।
सदा ध्यान रखिए ...
जहां धर्म तहां कृष्ण है और जहां कृष्णा तहां जीत ।
हां तो अब प्रश्न ये है कि हमें क्या करना चाहिए ...
उत्तर है कि इस राष्ट्र की रक्षा, इस राष्ट्र को सम्मान, इस राष्ट्र की ख्याति और इस राष्ट्र का भविष्य केवल वह पहले तरह का हिंदू ही सुनिश्चित करेगा जो गर्व से कहता है कि मैं हिंदू हूं । वह राष्ट्र की रक्षा करने के साथ-साथ धर्म की रक्षा करने के साथ-साथ उन बाकी तीन प्रकार के बचे हुए हिंदुओं का बोझ भी ढोएगा तो आप अपने दिल पर हाथ रखकर पहले तो यह चिंतन कीजिए कि आप किस तरह की हिंदू है यदि आप पहले तरह के हिंदू नहीं है जो गर्व से कहता है कि मैं हिंदू हूं तो आपको पहली तरह का हिंदू बनने का प्रयास करना चाहिए ।
आपको प्रयास करना चाहिए कि आप उस हिंदू के साथ खड़े रहें जो गर्व से स्वयं को हिंदू कह रहा है आप प्रयास कीजिए कि आपके पास जो भी क्षमता है आप उस हिंदू को लिए समर्पित करें जो गर्व से कह रहा है कि वह हिंदू है क्योंकि वह पहले तरह का हिंदू ही भविष्य में आपको बचाएगा और आपके बच्चों का भविष्य सुरक्षित करेगा ।
पूज्य हेडगेवार जी और गुरु गोलवलकर जी जैसा हिंदू चाहते थे वैसा हिंदू बनिए ।
वह चाहते थे कि हिंदू संगठित रहे, हिन्दू आत्मविश्वास से भरा हो, हिंदू बलवान बने, हिंदू भ्रमित न रहे और हिंदू अनुशासित रहे तो जिस हिंदू में इतने सारे गुण होंगे वह स्वयं पर गर्व करेगा ही और वह बिना झिझक के बोलेगा "गर्व से कहो हम हिंदू हैं"
और अंतिम बात भ्रमित मत रहिए । संगठित रहिए । सक्षम रहिए । समर्थ रहिये #सामाजिक समस्या #🌍भारतीय इतिहास📚 #विश्व सनातन उत्थान संगठन