Kamal Ashraf
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2 days ago
⚈◢ ✰══❖═══✰══❖═══ ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ  ✰═══❖══✰═══❖══✰ *शब - ए - क़दर् * ❖══✰═══❖ *◐☞_शबे कद्र क्या है ? ◐* *❖_रमजान मुबारक की रातों में से एक रात शबे कदर कहलाती है जो बहुत ही कदर व मनाजिलात और खैरो बरकत की हामिल रात है । इसी रात को अल्लाह ताला ने हजार महीनों से अफज़ल क़रार दिया है । हजार महीने के 83 साल 4 महीने बनते हैं। यानी जिस शख्स की यह एक रात इबादत में गुजरी उसने 83 साल 4 महीने का जमाना इबादत में गुज़ार दिया और 83 साल का जमाना कम से कम है।* *★_ क्योंकि "_ खैरुम मिन अलफि शहर " कहकर इस अमर् की तरफ इशारा फरमाया गया है कि अल्लाह करीम जितना ज्यादा अजर् अता फरमाना चाहेगा अता फरमा देगा, इस अजर् का अंदाजा इंसान के बस से बाहर है।* *◐☞ शबे कद्र का मफहूम ◐* *❖_इमाम ज़हरी रहमतुल्लाहि अलैहि फरमाते हैं कि " कद्र "का मायनी मर्तबा से है क्योंकि ये रात बाकी रातों के मुकाबले में शर्फ व मर्तबा के लिहाज से बुलंद है इसलिए इसे लैलतुल कद्र कहा जाता है ।* *❖_हजरत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजियल्लाहु अन्हु से मर्वी है जो कि इस रात में अल्लाह ताला की तरफ से 1 साल की तकदीर व फैसले का कलमदान फरिश्तों को सौंपा जाता है इस वजह से यह लैलतुल कद्र कहलाती है।* *❖_ इस रात को कद्र के नाम से ताबीर करने की वजह यह भी बयान की जाती है :- इस रात में अल्लाह ताला ने अपनी का़बिले कदर किताब का़बिले कदर उम्मत के लिए साहिबे कद्र रसूल की मार्फत नाजिल फरमाई, यही वजह है कि इस सूरह में लफ्ज़े कद्र तीन दफा आया है।* *"®_ तफसीरे कबीर-28:32,* *❖_ लफ्ज़े कद्र के मानी में इस्तेमाल होता है इस लिहाज से इस रात को कदर् वाली कहने की वजह यह है कि इस रात आसमान से फर्से जमीन पर इतनी कसरत के साथ फरिश्तों का नुजूल होता है कि जमीन तंग हो जाती है।* *"®_ तफसीरे खाजिन -4:395,* *❖_इमाम अबू बकर अल वराक़ " कद्र "की वजह बयान करते हुए कहते हैं कि यह रात इबादत करने वाले को साहिबे कद्र बना देती है अगरचे वह पहले इस लायक़ नहीं था ।* *"®_कुरतुबी _,* *❥═┄ ʀεғεʀεηcε ↴* *📕 शबे कद्र और उसकी फज़ीलत,* #❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋 #🤗रमजान स्पेशल😍🤝 #🤲 इबादत