🌹बदलाव की शुरुआत एक से🌹
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एक लड़का रोज़ सुबह तालाब के किनारे दौड़ने जाया करता था। आते-जाते वह देखता कि एक बूढ़ी महिला हर दिन तालाब के किनारे बैठे छोटे-छोटे कछुओं की पीठ को ध्यान से साफ़ कर रही होती है। यह दृश्य वह कई दिनों तक देखता रहा, लेकिन एक दिन उससे रहा नहीं गया। उसने पास जाकर आदर से नमस्ते किया और पूछा—“आंटी जी, मैं आपको रोज़ कछुओं की पीठ साफ़ करते देखता हूँ, आप ऐसा क्यों करती हैं?” बूढ़ी महिला ने स्नेह से उसकी ओर देखा और बोली—“बेटा, इन कछुओं की पीठ पर एक कठोर कवच होता है, जिस पर समय के साथ कचरा जम जाता है।
इससे उनकी गर्मी ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है, तैरने में परेशानी होती है और यदि लंबे समय तक यह गंदगी साफ़ न की जाए तो उनका कवच कमजोर हो जाता है, जिससे उनकी ज़िंदगी खतरे में पड़ जाती है। मैं हर रविवार यहाँ आकर इन्हें साफ़ करती हूँ, इससे मुझे भीतर से शांति और सुकून मिलता है।” यह सुनकर लड़का बोला—“आप बहुत अच्छा काम कर रही हैं, लेकिन यहाँ तो सैकड़ों कछुए हैं, आप सबकी मदद नहीं कर सकतीं, फिर आपके इस प्रयास से कोई बड़ा बदलाव कैसे आएगा?” बूढ़ी महिला मुस्कुराईं, पास में बैठे एक कछुए को तालाब में छोड़ते हुए बोलीं—“हो सकता है मेरी इस कोशिश से दुनिया न बदले, लेकिन इस एक कछुए की पूरी दुनिया तो बदल गई ना।
यही सोचकर मुझे खुशी मिलती है कि मैं पूरी दुनिया नहीं, पर किसी एक की दुनिया बदल पाई।” यह सुनकर लड़के की आँखों में चमक आ गई और वह समझ गया कि बदलाव की शुरुआत हमेशा छोटे कदम से ही होती है।
शिक्षा ...
यह कहानी हमें सिखाती है कि यह सोचकर अच्छे काम से पीछे नहीं हटना चाहिए कि हमारे प्रयास से दुनिया नहीं बदलेगी, क्योंकि संभव है कि उसी छोटे से प्रयास से किसी एक की पूरी ज़िंदगी बदल जाए। जैसे बूंद-बूंद से समुद्र बनता है, वैसे ही छोटे-छोटे अच्छे कार्य मिलकर समाज में बड़ा बदलाव लाते हैं। इसलिए हमें अपनी क्षमता के अनुसार अच्छाई करते रहना चाहिए, क्योंकि सच्चा सुकून उसी में है कि हम किसी एक के जीवन में उम्मीद, सहारा और मुस्कान बन सकें।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👍 डर के आगे जीत👌 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇