एक चिट्ठी दिल्ली के सिंहासन को..
राजाधिराज आपके श्री चरणों में सादर प्रणाम ..
प्रणाम एक औपचारिक संस्कार है जिसे निभाना हमारा शिष्टाचार तो है ही परम्परा भी है सो व्यथित मन से इस परम्परा की औचारिकता निभा रहा हूं ..
राजा साहब देख तो रहे होंगे आप..पूरा देश जातीय संघर्ष की ओर बढ़ रहा है.. निश्चित ही आपको आभास भी होगा कि इस घृणा का परिणाम गृहयुद्ध भी हो सकता है.. ईमानदारी से बताइए राजाधिराज कि आप तो एक समान नागरिक आचार संहिता के आक्सीजन हेतु लाए गये थे फिर यह असमानता के विष वृक्ष को खाद पानी देकर हवा में कार्बनडाईआक्साइड क्यों घोल दिया आपने.. जी हवा विषाक्त हो चली है जो सामान्य वर्ग " आपके शब्दों में अगड़ी जातियों " के नथुने से होकर सिर्फ उनके फेफड़े को ही नहीं बल्कि सभी देशवासियों {जाति कोई भी हो} के फेफड़े को जहरीला कर देगी..
ठीक समझ रहे है आप मै UGC पर बात तो कर ही रहा हूं मै Sc..St एक्ट पर भी बात कर रहा हूं..
राजा साहब..
हमें भी पंडितवा बभना ठुकुरवा बनियवा ललवा वगैरह वगैरह शब्दों से नवाजा जाता है.. जातिगत आधार पर हमे भी अपशब्द कहे जाते हैं .. मध्य प्रदेश का कोई एक IAS हमारी बहन बेटियों पर बेधड़क अमर्यादित टिप्पणी करता है तो स्वामी प्रसाद मौर्य जैसा कोई दुष्ट ( और भी हैं ) सारी सीमाएं लांघ रहा है.. अभी एक युवा फर्जी Sc ..St एक्ट में बुजुर्ग होकर जेल से बाहर हुआ है.. निर्दोष था पर यह बात बीस साल बाद प्रमाणित हुई.. ऐसे हजारों प्रकरण हैं और इसके लिए कोई न्याय व्यवस्था या पुलिसिया प्रशासन जिम्मेदार नहीं है राजा साहब.. इसके लिए जिम्मेदार है जातीय आधार पर स्थापित कानून .. आग पहले से जल रही थी आपने उसी आग में घी डालते हुए UGC के नए नियम लागू कर दिया.. पहले सामान्य वर्ग उत्तेजित हुआ फिर माननीय सर्वोच्च न्यायालय की रोक के बाद ओबीसी और अनुसूचितजाति जनजाति के कुछ लोग सड़कों पर हैं .. शोर है शराबा है जो हमें खून खराबा तक भी ले जाए तो अप्रत्याशित नहीं होगा .. हमारे बच्चे कल लहूलुहान होकर घर लौटें या न भी लौटें तो भी इससे आपकी सेहत पर कोई प्रभाव तो पड़ता नहीं.. शायद इसलिए आप मौन है.. वैसे तो घंटों घंटों बोलते रहते हैं आप.. मन की बात घंटों करते है आप पर इस संदर्भ में चुप्पी क्यों ??
मौनी बाबा तो पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी थे आप तो 56 इंची हैं जनाब ..मुंह खोलिए.. बोलिए जनाब बोलिए.. मन की बात ही कर डालिए पर यूं चुप चाप एक वीभत्स भविष्य की प्रतीक्षा मत करिए ..
सरकार मेरे ..
सीधा सरल बिना किसी आपत्ति के आसान सा उपाय है " एक समान नागरिक आचार संहिता " देश में एक कानून.. यह कल्पना यह कामना कांग्रेस या समाजवादियों वामपंथियों की नहीं थी.. यह कल्पना पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी जैसे लोगों की थी.. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीय जनसंघ की थी.. भारतीय जनता पार्टी की भी थी.. आप उन्हीं के वंशज हैं.. क्षमा करिएगा पर यह देश माफ नहीं करेगा आपको यदि यूं ही मौन रहे तो.. यह आपकी चुप्पी है कि स्वामी प्रसाद् मौर्य जैसे कुकुरमुत्ते या जिनके लिए हिंदी शब्द कोष के अस्पृश्य समझे जाने वाले सभी शब्द और उपाधियां भी बौनी होंगी.. कल भी भौंक रहे थे आज भी भौंक रहे है..
राजा साहब ..
यह अनायास नहीं है ..हमारे देखते देखते मनुवाद ब्राह्मणवाद सामंतवाद की आड़ में सामान्य वर्ग के विरुद्ध एक वातावरण इस देश में तैयार हुआ .. सत्ता सिंहासन की दौड़ में जातिवादी शक्तियों ने वातावरण विषाक्त किया पर जब आप आए तो एक उम्मीद आई कि अब और नहीं.. पर अफसोस ..
पत्र लंबा हो रहा है सो..
निष्कर्षतः..
कुंभकर्णी नीद को त्यागिये और एक समान नागरिक आचार संहिता लागू करिए ..सभी देशवासियों के लिए जातीय आधार पर अपमानित करने के विरुद्ध कठोर दंड की व्यवस्था देने वाला एक कानून भी लाइए.. ठीक वैसे ही जैसे देश में स्थापित बहुत सारे आपराधिक कानून या सिविल कानून जो बिना किसी भेदभाव के सब पर समान रूप से लागू होते हैं !
एक समान कानून लाइए लागू करिए.. समाज में समभाव सदभाव समरसता बनी रहे इसकी चिन्ता करिए अन्यथा हम तो मान कर बैठे ही हैं कि " यह कालखंड आसुरी प्रवृत्तियों के प्रभाव का कालखंड है " यह तो होना ही है शायद ..
धन्यवाद् सादर वन्दे 🙏🏻
सवर्ण एकता" Atul Tiwari MYogiAdityanath
शेयर-फॉलो 👍
#✊ भारत में बदलाव #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🇮🇳 देशभक्ति #👍 मोदी फैन क्लब #📰योगी आदित्यनाथ