??? - सुनो !!
ह्म्म्म..!!
कुछ नहीं ..जाने दो..
कहो भी.. सुन रही हूँ मैं..
जानता हूँ सुन रही हो तुम..पर यकीन मानो खुद मैं नहीं जानता कि मुझको आखिर कहना क्या है...
एक हुजूम सा है विचारो का मन में, मन कहीं ठहरता ही नहीं ..कोई एक सोच टिक कर नही रहती कभी.. कभी कभी मन करता है खुद को छुपा लूँ ..
की कोई दुनिया मुझे न देखे उनके सवालो उनकी नज़रों से बस गायब हो जाऊँ ..
तो कभी मन करता है उस पहाड़ की चोटी पर चढ़ कर बहुत चिल्लाऊँ के मेरे अंदर का तूफान कुछ पल तो ठहर जाये.. एक समंदर लिए फिरता हूँ हर पल ..
कहना होता है पर क्या खुद नहीं जानता ...
खैर जाने दो ये बाते हमे और उदास कर देगी.. बस जब मन बहुत भर जाता है और Depression आ जाता है..
तुम्हे पुकार लेता हूँ..!! कहना क्या है खुद नहीं जानता..
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मम्म.. सुनो??
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