#BREAKING NEWS हरीश राणा के पक्ष में पैसिव यूथेनेशिया (इच्छामृत्यु) का फैसला सुनाते वक्त बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के अंदर जिस तरह का भावनात्मक पल पैदा हुआ, ऐसा संभवत: देश के सर्वोच्च अदालत के लिए बहुत ही दुर्लभ है। 32 वर्षीय हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस जे बी पारदीवाला कुछ देर के लिए बहुत ही भावुक नजर आए।
दिल्ली से सटे गाजियाबाद के रहने वाले 32 वर्षीय हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से 'परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट' (एक तरह से कोमा की स्थिति) में बिस्तर पर हैं। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच ने बुधवार को उनके परिजनों को उनसे लाइफ-सस्टेंनिंग मेडिकल ट्रीटमेंट (व्यक्ति को जीवित रखने की मशीन) हटाने की इजाजज दे दी है।