#बाबा आमटे जी पुण्यतिथि
“कमज़ोर मनुष्य ही हाथ की लकीरें देखता है।”
“परोपकार बड़ा धर्म है।” - बाबा आमटे (26 दिसंबर 1914 – 9 फरवरी 2008)
अपना सम्पूर्ण जीवन कुष्ठ रोगियों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए समर्पित तथा समाज से परित्यक्त लोगों और कुष्ठ रोगियों के लिये अनेक आश्रमों की स्थापना करने वाले महान समाजसेवी एवं पद्म विभूषण से सम्मानित “बाबा आम्टे जी” की 18वीं पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
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