दे श में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर हाहाकार मच गया है। प्राइवेट सेक्टर की दिग्गज तेल कंपनी नायरा (Nayara) के बाद अब शेल इंडिया (Shell India) ने भी ईंधन की कीमतों में ऐसी ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है, जिसने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल का हवाला देते हुए शेल ने डीजल के दामों में सीधे ₹25.01 प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। वहीं, पेट्रोल की कीमतों में भी ₹7.41 प्रति लीटर की बड़ी वृद्धि की गई है। इस अचानक हुई बढ़ोतरी के बाद शेल के पेट्रोल पंपों पर अब ईंधन भरवाना जेब पर बहुत भारी पड़ने वाला है।
शेल के पंपों पर क्या हैं अब नई कीमतें?
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, इस ताजा बढ़ोतरी के बाद शेल इंडिया के आउटलेट्स पर सामान्य डीजल की कीमत बढ़कर ₹123.52 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। अगर आप डीजल का प्रीमियम वेरिएंट इस्तेमाल करते हैं, तो इसके लिए अब आपको ₹133.52 प्रति लीटर का भुगतान करना होगा। पेट्रोल की बात करें तो बेंगलुरु जैसे शहरों में अब सामान्य पेट्रोल ₹119.85 और पावर वेरिएंट (प्रीमियम पेट्रोल) ₹129.85 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में स्थानीय करों (VAT) और परिवहन लागत के कारण इन कीमतों में मामूली अंतर हो सकता है, लेकिन पूरे देश में शेल के ग्राहकों के लिए अब तेल काफी महंगा हो चुका है।
प्राइवेट कंपनियों ने बढ़ाए रेट
एक तरफ जहां शेल और नायरा जैसी निजी कंपनियां दाम बढ़ा रही हैं, वहीं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) अभी भी सरकार के हस्तक्षेप के कारण पुरानी कीमतों पर ही तेल बेच रही हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि सरकारी कंपनियों को घाटे की स्थिति में सरकार से वित्तीय मुआवजा या सब्सिडी की उम्मीद रहती है, लेकिन निजी कंपनियों के पास ऐसा कोई सुरक्षा कवच नहीं है। कच्चे तेल के बढ़ते दामों के बीच खुद को दिवालिया होने से बचाने और घाटे को कम करने के लिए निजी कंपनियों के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। यही वजह है कि सरकारी और प्राइवेट पंपों के रेट में अब ₹20 से ₹30 तक का बड़ा अंतर दिखने लगा है।
कच्चे तेल की 'आग' ने बिगाड़ा खेल
ईंधन की इन अभूतपूर्व कीमतों के पीछे असली वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें हैं। फरवरी के अंत में जब से अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ मोर्चा खोला है, तब से वैश्विक तेल आपूर्ति (Supply Chain) बुरी तरह प्रभावित हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में महज एक महीने में 60 फीसदी तक का उछाल आया है और यह लगातार $100-$106 प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 फीसदी हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाली किसी भी हलचल का सीधा असर हमारे देश की अर्थव्यवस्था और पेट्रोल पंपों की कीमतों पर पड़ता है।
महंगाई बढ़ने का मंडराया खतरा
डीजल की कीमतों में ₹25 की यह रिकॉर्ड बढ़ोतरी केवल वाहन मालिकों को ही प्रभावित नहीं करेगी, बल्कि इसका असर माल ढुलाई (Logistics) पर भी पड़ेगा। डीजल महंगा होने से ट्रकों का किराया बढ़ेगा, जिससे फल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें जल्द नीचे नहीं आईं, तो आने वाले हफ्तों में सरकारी तेल कंपनियां भी अपनी कीमतों में संशोधन करने को मजबूर हो सकती हैं, जो पूरे देश में महंगाई का एक नया दौर शुरू कर सकता है।
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