RD KHASIYA
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7 days ago
#🌞 આજના ચોઘડિયા 🌚 *🌞~ हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 16 जनवरी 2026* *⛅दिन - शुक्रवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - शिशिर* *⛅मास - माघ* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - त्रयोदशी रात्रि 10:21 तक तत्पश्चात् चतुर्दशी* *⛅नक्षत्र - मूल पूर्ण रात्रि तक* *⛅योग - ध्रुव रात्रि 09:06 तक तत्पश्चात् व्याघात* *⛅राहुकाल - सुबह 11:15 से दोपहर 12:37 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 07:10* *⛅सूर्यास्त - 06:03 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:25 से प्रातः 06:18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:15 से दोपहर 12:58 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:10 जनवरी 17 से रात्रि 01:03 जनवरी 17 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, मेरु त्रयोदशी* *🌥️विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *🔹वास्तुशास्त्र के अनुसार ईशान-स्थल की महत्ता🔹* *🔸कमरे में पूर्व व उत्तर दिशा के बीचवाले कोने से कमरे की पूर्वी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग व उत्तरी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग लेकर जो आयताकार स्थल बनता है, वह ‘ईशान-स्थल’ कहलाता है । १२ X १८ के कमरे का ईशान-स्थल ४ X ६ का होगा । खुले भूमिखंड के विषय में भी ऐसे ही समझना चाहिए ।* *🔹सुख-शांतिप्रदायक ईशान-स्थल🔹* *🔸सुख-शांति और कल्याण चाहनेवाले बुद्धिमानों को अपने घर, दुकान या कार्यालय में ईशान-स्थल पर अपने इष्टदेव, सदगुरु का श्रीचित्र लगा के वहाँ धूप-दीप, मंत्रोच्चार तथा साधना-ध्यान पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुख करके करना चाहिए । यह विशेष सुख-शांतिदायक है ।* *🔹सुख-समृद्धि में वृद्धि हेतु🔹* *🔸भूमिखंड के ईशान कोण तथा पूर्व एवं उत्तर दिशा में खाली भाग अधिक होना चाहिए और इन भागों में अपेक्षाकृत वजन में हलके व कम ऊँचाईवाले पेड़-पौधे लगाने चाहिए । भूमिखंड के ईशान-स्थल में तुलसी, बिल्व व आँवला लगाना सुख-समृद्धिकारक है ।* *🔹ज्ञानार्जन में सहायता व सत्प्रेरणा हेतु🔹* *🔸विद्यार्थियों के लिए भी ईशान कोण बड़े महत्त्व का है । पूर्व एवं उत्तर दिशाएँ ज्ञानवर्धक दिशाएँ तथा ईशान-स्थल ज्ञानवर्धक स्थल है । जो विद्यार्थी ईशान-स्थल पर बैठ के पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पढ़ता है, उसे ज्ञानार्जन में विशेष सहायता मिलती है । पूर्व की ओर मुख करने से विशेष लाभ होता है । अध्ययन-कक्ष में सदगुरु या ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों के श्रीचित्र लगाने चाहिए, इससे सत्प्रेरणा मिलती है ।* *🚩 जय हो मात श्री धोली सती दादीजी की🚩* #🔯 પંચાંગ #🌅દૈનિક પંચાગ🏪 #🙏🌹નિત્ય દશઁન🌹🙏