"बहकता दिल"
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सरसराते हुए भी दिल
जो बहकते रहे,
कोई संग होकर ही
कभी अपनी खबर लेता!
बड़ी ही उलाहने हैं नजरों को
हमारे चेहरे पे,
धीमे-धीमे ही कोई
बढ़कर ही हमे थाम लेता!
बनकर हवा चुपके से
लबों को छूए जाए,
दुआ बनकर ही
इस दामन को भी भर देता!
कभी पग लड़खड़ाते
इन उभरे डगर पे,
हर रश्क भी अपने
होंठो से ही चुन लेता!
एक बार देख जाए अपनी
गहरी नजर से,
कुछ कम हो जाते
औऱ भी मरहम भर लेता!
मोहब्ब्त तो है ही पगों को
यूँ तो समझने को,
कोई हंसकर ही
साथ कुछ रस पी लेता!
सच है इस ज़िंदगी में अब
प्यार भरे लम्हे हैं,
पर संग में और भी
बहुत कुछ है ये कह देता!
बड़ी कसमकस है इन उड़ते
पंखों के दरम्यान अब,
सच कुछ होते फूलों से ख्याल तो
मैं भी तितलियों के बाहों में जी लेता!💕💞
..........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️