श्रीरामचरितमानस
सुमिरत जाहि मिटइ अग्याना ।
सोइ सरबग्य रामु भगवाना ।।
( बालकांड 52/ 2 )
राम राम बंधुओं , एकबार त्रेता युग में शिव जी सती जी के साथ अगस्त्य ऋषि के आश्रम से राम कथा सुनकर लौट रहे थे। उसी समय दंडक वन में राम जी सीता जी को खोज रहे थे । राम जी को पाकर शिव जी ने सच्चिदानंद कह कर प्रणाम किया । सती जी को राम जी के इस रूप को देखकर मोह हो गया । उन्होंने सीता जी का रूप धारण कर राम जी की वास्तविकता जानने की कोशिश की । परमात्मा इस बात को जान गये कारण जिसके स्मरण मात्र से अज्ञान दूर हो जाता है वही सर्वज्ञ भगवान राम जी हैं ।
मित्रों , न हमें ज्ञान है न ही हमारे जीवन में राम स्मरण है फिर हमारा अज्ञान कैसे दूर हो ? आप अपना अज्ञान ( मोह ) दूर करना चाहते हैं तो उपाय केवल राम सुमिरन है ।अस्तु राम सुमिरन करते हुए , सीताराम जय सीताराम 🚩🚩
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