M P SINGH
510 views
*"योग: कर्मसु कौशलम्"* *कर्मों में कुशलता ही योग है।* ​यदि कोई व्यक्ति बिना योग्यता के किसी जिम्मेदारी वाले पद पर बैठता है तो वह अपने 'स्वधर्म' का पालन नहीं कर पाएगा,इससे न केवल उस व्यक्ति का पतन होता है बल्कि पूरे समाज की व्यवस्था बिगड़ती है। *धृतराष्ट्र ने योग्यता को नकार कर पुत्र मोह में अयोग्यता का वरण किया और सर्वनाश को प्राप्त हुआ,योग्यता फिर से श्रेष्ठता को प्राप्त हुई,अतः काल चक्र की चिंता को त्याग कर कर्म ही करना चाहिए।* *जय श्रीकृष्ण* 🪷🪷🙏🙏 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️