*श्रीमद्भागवत महापुराण*
*प्रथम स्कंध - अध्याय एक*
*श्रीसूतजीसे शौनकादि ऋषियों का प्रश्न*
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रसके मर्मज्ञ भक्तजन! यह श्रीमद्भागवत वेदरूप कल्पवृक्षका पका हुआ फल है। श्रीशुकदेवरूप तोतेके* मुखका सम्बन्ध हो जानेसे यह परमानन्दमयी सुधासे परिपूर्ण हो गया है। इस फलमें छिलका, गुठली आदि त्याज्य अंश तनिक भी नहीं है। यह मूर्तिमान् रस है। जबतक शरीरमें चेतना रहे, तबतक इस दिव्य भगवद्रसका निरन्तर बार-बार पान करते रहो। यह पृथ्वी पर ही सुलभ है ।। 3 ।।
एक बार भगवान् विष्णु एवं देवताओं के परम पुण्यमय क्षेत्र नैमिषारण्यमें शौनकादि ऋषियों ने भगवत्प्राप्ति की इच्छासे सहस्र वर्षों में पूरे होनेवाले एक महान् यज्ञका अनुष्ठान किया ।। 4 ।। एक दिन उन लोगोंने प्रातःकाल अग्निहोत्र आदि नित्यकृत्योंसे निवृत्त होकर सूतजीका पूजन किया और उन्हें ऊँचे आसन पर बैठाकर बड़े आदरसे यह प्रश्न किया ।। 5 ।।
* यह प्रसिद्ध है कि तोतेका काटा हुआ फल अधिक मीठा होता है।
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भागवत महापुराण
गीता प्रेस
राणा जी खेड़ांवाली🚩62 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌸 जय श्री कृष्ण😇