महाशिवरात्रि: अंधकार से प्रकाश की ओर एक महायात्रा 🔱
"न आदि है, न अंत है, शिव ही अनंत है,
शून्य में जो गूंजता, वही ओंकार अत्यंत है।
जो विष पीकर भी नीलकंठ कहलाए,
उस महाकाल के चरणों में, यह जगत शीश झुकाए।"
सनातनी परंपरा में महाशिवरात्रि केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि एक ब्रह्मांडीय घटना (Cosmic Event) है। यह वह रात्रि है जो सामान्य रात्रियों की तरह केवल 'अंधेरा' नहीं लाती, बल्कि अज्ञान की नींद से जगाकर 'शिवत्व' के प्रकाश की ओर ले जाती है।
महाशिवरात्रि का अर्थ है-: शिव की महान रात्रि। पुराणों और श्रुतियों के अनुसार, इसके तीन प्रमुख पहलू हैं:
* शिव-शक्ति का मिलन: यह वह रात्रि है जब वैराग्य के प्रतीक 'शिव' और शक्ति की प्रतीक 'माँ पार्वती' का विवाह हुआ था। यह जड़ और चेतन, पुरुष और प्रकृति के संतुलन का उत्सव है।
* लिंगोद्भव: माना जाता है कि इसी रात भगवान शिव निराकार से साकार रूप में (लिंग रूप में) प्रकट हुए थे।
* नृत्य और निश्चलता: यह रात उस 'तांडव' की भी है जो सृष्टि का चक्र चलाता है, और उस 'निश्चलता' की भी जो कैलाश पर ध्यानमग्न शिव में है।
"मिट्टी का शरीर है, पर आत्मा शिव का अंश है,
जो खुद को मिटा दे चरणों में, वही "मैं" का विध्वंस है।
अहंकार की राख से ही, भस्म का श्रृंगार हो,
जब 'मैं' खत्म हो जाए, तब ही शिव का साक्षात्कार हो।"
महाशिवरात्रि को 'जागरण की रात्रि' क्यों कहा जाता है? इसके पीछे गहरा विज्ञान है:
* ऊर्जा का प्राकृतिक चढ़ाव (Upsurge of Energy): खगोलीय रूप से, इस रात ग्रह ऐसी स्थिति में होते हैं कि उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में ऊर्जा का प्रवाह स्वाभाविक रूप से ऊपर की ओर होता है।
* अपकेंद्रीय बल (Centrifugal Force): पृथ्वी की स्थिति और घूर्णन इस समय ऐसा होता है कि एक विशेष अपकेंद्रीय बल कार्य करता है।
* रीढ़ की हड्डी (Spine): यदि आप इस रात अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा (Vertical) रखते हैं और सोते नहीं हैं, तो यह प्राकृतिक ऊर्जा आपके शरीर में ऊपर की ओर चढ़ती है, जो आध्यात्मिक जागृति और कुंडलिनी जागरण के लिए सहायक होती है।
सरल शब्दों में, प्रकृति स्वयं आपको 'ऊपर उठाने' के लिए धक्का दे रही है, बस आपको उस प्रवाह के साथ जागते रहना है।
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यह रात केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, यह आत्म-रूपांतरण (Self-Transformation) का अवसर है:
* मौन रहें: बाहरी शोर को बंद करें ताकि भीतर का 'नाद' सुनाई दे।
* ध्यान करें: अपनी रीढ़ सीधी रखें और अपनी श्वास पर ध्यान दें।
* संकल्प लें: अपने भीतर की एक बुराई (काम, क्रोध, लोभ) को शिव को समर्पित कर दें। शिव 'भोले' हैं, वे आपके अवगुणों का विष पीकर आपको अमृत प्रदान करेंगे।
"हे योगीश्वर!
मेरी श्वासों की माला में, तेरा ही नाम पिरोया है,
जागृत हो यह अंतर्मन, जो अब तक सोया है।
इस घोर रात्रि में, ज्ञान का दीप जला देना,
मुझे 'शव' से 'शिव' बनाकर, मुक्ति का मार्ग दिखा देना।"
आप सभी को महाशिवरात्रि की अग्रिम अनंत शुभकामनाएँ। महादेव आपकी चेतना को सर्वोच्च शिखर तक ले जाएँ।
॥ ॐ नमः शिवाय ॥ 🙏
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