क्षुत्क्षामोऽपि जराकृशोऽपि शिथिलप्राणोऽपि कष्टां दशाम्
आपन्नोऽपि विपन्नदीधितिरिति प्राणेषु नश्यत्स्वपि । 🌿
मत्तेभेन्द्रविभिन्नकुम्भपिशितग्रासैकबद्धस्पृहः
किं जीर्णं तृणमत्ति मानमहतामग्रेसरः केसरी ॥🌺
🌼अर्थात🌼
जंगल का राजा सिंह मदमस्त हाथी को देखते ही उसके मस्तक पर सवार होकर उसके कुम्भ्स्थल का भेदन करके अपना भोजन बनाने की इच्छा करता है, चाहे वह कितना ही भूखा, बूढा और दुर्बल, बलहीन, अत्यंत दुखी और तेजहीन क्यूँ न हो जाये, परन्तु प्राण संकट उपस्थित होने पर भी सूखी घास नहीं खा सकता ! 🍂
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