🇮🇳⃝🇬𝘂𝗽𝘁𝗮 𝗷𝗶 🚩⃝🙏🏻
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3 days ago
🙏राम राम जी : CJC🙏 *रिश्तों की महक* """"""""""""""""""""" दोपहर का समय था। घर के किसी पुराने मसले को लेकर ममता(जेठानी) और पल्लवी(देवरानी) के बीच बहस छिड़ गई। *बात छोटी सी थी, पर अहंकार के टकराव ने उसे बड़ा बना दिया।* ममता (गुस्से में चिल्लाते हुए): *"अगर तुम्हें लगता है कि मेरी बातें चुभती हैं, तो आज से मैं तुमसे बोलना ही बंद कर दूँगी!"* पल्लवी (आवेश में आकर): *"ठीक है दीदी! अगर आपको ऐसा ही लगता है, तो मैं भी आज कसम खाती हूँ कि आज के बाद न तो मैं आपसे बात करूँगी और न ही कभी आपका मुँह देखूँगी!"* ममता: *"मुझे भी मंजूर है! मैं भी शपथ लेती हूँ कि आज के बाद तुम्हारी शक्ल तक नहीं देखूँगी।"* दोनों ने एक-दूसरे की तरफ से मुँह फेरा और पैर पटकती हुई अपने-अपने कमरों में चली गईं। किवाड़ इतने जोर से बंद हुए कि पूरे घर में सन्नाटा पसर गया। *पल्लवी कमरे में अकेली थी, पर उसका मन अशांत था। गुस्से की लहर शांत हुई तो उसे अपनी माँ की बरसों पुरानी सीख याद आई: _"बेटा, जब कभी किसी से अनबन हो जाए, तो उसकी बुराइयों की सूची बनाने के बजाय उसकी अच्छाइयों को याद करना।"_* पल्लवी ने आँखें बंद कीं। उसे ममता दीदी का वो रूप याद आया जब पल्लवी पहली बार इस घर में आई थी और ममता ने उसे अपनी सगी छोटी बहन की तरह गले लगाया था। उसे याद आया कि कैसे ममता अपनी नींद खराब करके पल्लवी के बच्चों का ख्याल रखती थी। *पल्लवी का हृदय ग्लानि से भर उठा। उसने सोचा, "एक छोटी सी बहस के लिए मैंने उस शख्स का मुँह न देखने की कसम खा ली जो मेरी ढाल बनी रहती है?"* पल्लवी उठी, रसोई में गई और दो कप कड़क अदरक वाली चाय बनाई। *वह चाय लेकर ममता के कमरे के पास पहुँची और कांपते हाथों से दरवाजा खटखटाया*— खट-खट! ममता (अंदर से ऊंची आवाज में): "कौन है बाहर?" पल्लवी: "दीदी... मैं हूँ!" ममता ने जैसे ही दरवाजा खोला, उसकी आँखों में वही पुरानी कड़वाहट और 'कसम' की याद थी। ममता (तमतमाते हुए): *"अभी तो बड़ी-बड़ी कसमें खाकर गई थी कि मेरा मुँह तक नहीं देखोगी! फिर यहाँ क्यों चली आईं? क्या अपनी कसम का भी मान नहीं रहा?"* पल्लवी (धीमी और विनम्र आवाज में): *"दीदी, सोचकर तो मैं वही गई थी और उस कसम पर कायम भी रहना चाहती थी। पर अचानक माँ की एक बात याद आ गई कि झगड़े में अपनों की अच्छाइयां देखनी चाहिए। जब मैंने अपनी आँखें बंद कीं, तो मुझे आपकी कड़वी बातें नहीं, बल्कि आपका दिया हुआ ढेर सारा प्यार और दुलार याद आया।"* पल्लवी ने चाय का कप आगे बढ़ाया और कहा, *"इस चाय के सामने मेरी कसम बहुत छोटी पड़ गई दीदी। क्या आप अपनी छोटी बहन को माफ नहीं करेंगी?"* ममता, जो खुद अंदर ही अंदर घुट रही थी, पल्लवी की बात सुनकर फफक कर रो पड़ी। उसने पल्लवी के हाथ से चाय की ट्रे ली और उसे जोर से गले लगा लिया। ममता: *"पगली, कसम तो मैंने भी खाई थी, पर मेरा दम घुट रहा था। तूने चाय पिलाकर मेरा गला और मेरा मन दोनों साफ कर दिए।"* दोनों साथ बैठकर चाय पीने लगीं। वो 'मुँह न देखने की कसम' प्रेम के आंसुओं में बह चुकी थी। दोस्तों, *गुस्से में खाई गई कसमें अक्सर रिश्तों को तोड़ देती हैं, लेकिन अगर एक पक्ष भी पुरानी अच्छाइयों को याद कर ले, तो प्रेम की जीत निश्चित है।* 👉इ मीडिया से साभार उद्धरित👈 #☝अनमोल ज्ञान #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #✍️ साहित्य एवं शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह