S. K. Sharma
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वृंदावन और रास बालपन का था एक स्वप्निल ऐहसास। आओ मुक्त होते है अब राधे देखो पुकार रहा है पुरुषार्थ !! माखन-मिसरी ,मोर पंख और बांसुरी ... संभाले रखना मेरे लिये तुम सब ! गूंजेगा पांचजन्य का स्वर देखो , मेरी उंगली पर आ टिका है अब सुदर्शन चक्र !! रक्त में भीगा होगा मेरा नाम इतिहास भी करे चाहे बदनाम याद दिलाना पर तुम सबको "बरसाने " में बिखरा मेरा अनुराग !! #jay shri krishna #shree krishana #shri krishna