"कभी-कभी"
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नयण मिला के अकसर हमसे,
मुस्कुराती हो जो कभी कभी।
ढचक-लचक के जो ऐसे,
बल खाती हो जो कभी कभी।
आँखों के पलकों को तुम ऐसे,
झपकाती हो जो कभी कभी।
चंचल होकर के तुम ऐसे,
शर्माती हो जो कभी कभी।
अपनी अदा के लहरों से,
बहकाती हो जो कभी कभी।
जान निकल जाती है कसम से,
खिलखिलाती हो जो तुम कभी कभी।💕💞
.......✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन 🌳🌳🌳🌳🌳
#🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💝 शायराना इश्क़ #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️