sn vyas
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#❤️जीवन की सीख एक संन्यासी लंबी यात्रा पर था। दिन भर चलने के बाद वह थक गया, इसलिए एक घने पेड़ की छांव देखकर वहीं विश्राम करने लगा। कुछ ही देर में उसे गहरी नींद आ गई… और उसी नींद में उसने एक अजीब सपना देखा। सपने में उसने देखा कि एक रास्ते से एक व्यापारी गुजर रहा है। उसके साथ पांच गधे थे, और हर गधे पर भारी-भरकम बोरे लदे हुए थे। उन बोझों के कारण गधे हांफ रहे थे, जैसे उनसे चलना मुश्किल हो रहा हो। संन्यासी ने आगे बढ़कर उस व्यापारी से पूछा— “भाई, इन बोरों में ऐसा क्या है जो बेचारे पशु इतनी तकलीफ से ढो रहे हैं?” व्यापारी मुस्कुराया और बोला— “ये सब इंसानों के काम की चीजें हैं, जिन्हें मैं बाजार में बेचने जा रहा हूं।” संन्यासी को आश्चर्य हुआ— “जरा बताओ तो सही, इनमें क्या-क्या भरा है?” व्यापारी ने पहले गधे की ओर इशारा करते हुए कहा— “इस पर जुल्म और अत्याचार का माल है। इसे खरीदने वाले वो लोग होते हैं जिनके पास ताकत और सत्ता होती है। ये बहुत महंगे दाम पर बिकता है।” संन्यासी ने दूसरा सवाल किया— “और इस दूसरे बोरे में क्या है?” व्यापारी ने उत्तर दिया— “इसमें घमंड भरा है। इसे पढ़े-लिखे और खुद को श्रेष्ठ समझने वाले लोग बड़े शौक से खरीदते हैं।” संन्यासी अब और उत्सुक हो गया— “तीसरे गधे का बोझ क्या है?” व्यापारी बोला— “इसमें जलन है। ऐसे लोग इसे खरीदते हैं जिन्हें दूसरों की सफलता देखकर चैन नहीं आता।” संन्यासी ने चौथे गधे की ओर देखा— “और इसमें क्या भरा है?” व्यापारी ने कहा— “यह धोखे और बेईमानी से भरा है। व्यापार में चालाकी से लाभ कमाने वाले लोग इसके सबसे बड़े ग्राहक हैं।” अब संन्यासी ने आखिरी गधे के बारे में पूछा— “और इस अंतिम बोरे में क्या रखा है?” व्यापारी थोड़ा झुककर बोला— “इसमें कपट और छल है। इसे वे लोग खरीदते हैं जो दूसरों को गिराकर खुद आगे बढ़ना चाहते हैं।” इतना सुनते ही अचानक संन्यासी की आंख खुल गई। वह कुछ देर तक शांत बैठा रहा, मानो उस स्वप्न का अर्थ समझने की कोशिश कर रहा हो। उसे एहसास हुआ कि वह व्यापारी कोई साधारण व्यक्ति नहीं था, बल्कि वही शक्ति थी जो दुनिया में बुराइयों को फैलाती है। और जो लोग अपने मन पर नियंत्रण नहीं रखते, वही इन बुराइयों के आसान शिकार बन जाते हैं। उसने मन ही मन निश्चय किया— यदि मन को स्वच्छ और स्थिर रखा जाए, और ईश्वर में सच्चा विश्वास बना रहे, तो कोई भी व्यक्ति इन बुराइयों से खुद को बचा सकता है। क्योंकि जब भीतर प्रकाश होता है, तब अंधकार अपने आप दूर हो जाता है।