संत कबीरदास जी अनुयाई ।
424 views
#❤️जीवन की सीख : #🙏सुविचार📿 : #✍️ जीवन में बदलाव : --- बुरा बनना बहुत आसान है । अच्छा बनना बहुत मुश्किल है । बुरा बनना बिल्कुल फूलों के चादर पर चलने जैसा है । अच्छा बनना बिल्कुल कांटों की सड़क पर चलने जैसा है । हमे जीवन में किस रास्ते पर चलना है इस का फैसला हमे करना रहता है । हो सके तो अच्छे रास्ते पर चले । नियम का पालन करे । कुछ भी हो जाय – गुस्सा क्रोध हिंसा नहीं करना है । चाहे जान चले जाय तो चले जाय । हो सके तो बुरे रास्ते पर नही चलना है । नियम को नही तोड़ना है । कुछ भी हो जाय – गुस्सा क्रोध हिंसा लालच नही करना है । चाहे भूखा प्यासा ही क्यों न मरना पड़े । केवल मेहनत कर के खाना है । परजीवी/पर-आश्रित बन कर नही । अपने हाथो से मजदूरी करनी है और फिर अनाज खाना है । इसके अलावा चोरी मक्कारी धोखा छल कपट कर के भोजन खाना और पानी पीना भी अच्छी बात नही है । अच्छा बनने की कोशिश करें और बीरा बनने की नही । सुझाव : आप से जो उम्र में कम है और उनकी बातो पर अधिक ध्यान मत दीजिए । वह सब कुछ गलत ज्ञान लेकर बैठे हुए है । वह हमे भी गलत रास्ते पर ले कर चले जाएंगे । तो अपने से उम्र में छोटे आयु के इंसान की बात न सुने । उम्र से आयु में छोटे इंसान को केवल और केवल बड़ो का आज्ञाकारी होना चाहिए और कुछ नही । जो आज्ञाकारी नही है वह चोरी मक्कारी धोखेबाजी छल कपट कर रहा है । हमे इस देश को चोरों का देश । मक्कारो का देश । धोकेबाजो का देश । छल कपट करने वालो का देश । बईमानी करने वालो का देश । बनने नही देना है । बचपन से हर दिन एक बच्चे के जब सही गलत के बीच का अंतर बताया जाय तो वह वयस्क होने तक सब सीख जाता है । पहले खुद अच्छे बने और सच्चे ईमानदार मेहनती आज्ञाकारी बने । और फिर अपने आने वाले पीढियों को सच्चा ईमानदार मेहनती आज्ञाकारी बनाय । हम भारतीय इंसान को केवल ब्राह्मण धर्म के नियम का पालन करना चाहिए । ब्राह्मण के गुरु हैं परमपिता परमात्मा संत कबीरदास जी है । ब्राह्मण को परमपिता परमात्मा संत कबीरदास की आज्ञा का पालन करना चाहिए । ब्रह्मा जी ने अपने गुरु परमपिता परमात्मा संत कबीरदास जी की बात नही मानी और रास्ते से भटक गए । जो रास्ते से भटक जाता है । उस से पैसा अनाज पानी दूर चले जाते है । अगर आपको समझना है की आप सही रास्ते पर चल रहे है य नही तो इसका फैसला इस मापदंड से करें की आपके पास जरुरत से ज्यादा नही मगर जरूरत के अनुसार अनाज पैसा पानी है य नही है । अगर इन में से थोड़ी सी भी कमी है आपके पास तो आप गलत रास्ते पर चल रहे है । अब या तो चोरी कीजिए । धोखा कीजिए । छल कपट कीजिए । मक्कारी कीजिए । झूठ बोलिए । परजीवी/पर-आश्रित बनिए । जैसे भी अनाज पानी और पैसे को पाने की कोशिश कर सकते है कीजिए । मरना ऐसे जीवन के जीने से ज्यादा बेहतर है । अगर हो सके तो । और अगर न हो सके तो हम चोरी मक्कारी छल कपट बेईमानी कर सकते है । "या" मन से ईश्वर को याद करते करते भूखे प्यासे मर सकते है । मरना तो एक दिन है ही । मेरा सुझाव है कि आज से ही ईश्वर को याद करना शुरू कर देना चाहिए भले कल भूखा और प्यासा ही क्यों न मरना पड़े । आज जब हमे भूखा प्यासा नही रहना पड़ रहा है तब ही ईश्वर को याद कर लेना बेहतर है कि जब कल जब हम भूखे प्यासे मर रहे होंगे तब हम ईश्वर को मन से याद करते हुए मर जाय । ---