#🥰Express Emotion `भाग - 19 (विषय: दिखावे की भक्ति)`
*आज की जिज्ञासा:*
```"महाराज जी, क्या माला और तिलक लगाना जरूरी है? क्या बिना दिखावे के भक्ति नहीं हो सकती?"```
*महाराज जी का समाधान:*
```"तिलक और माला 'दिखावा' नहीं, बल्कि 'वर्दी' है। जैसे सिपाही वर्दी पहनकर अनुशासित रहता है, वैसे ही तिलक और कंठी तुम्हें गलत काम करने से रोकती हैं। यह तुम्हें याद दिलाती रहती हैं कि तुम किसके हो। हाँ, भीतर का भाव मुख्य है, लेकिन बाहर का नियम उस भाव की रक्षा करता है। लोक-लाज छोड़ो, प्रभु की लाज रखो। दुनिया क्या कहेगी, यह सोचोगे तो भक्ति नहीं कर पाओगे।"```
*आज का दिव्य सूत्र:*
> "प्रभु के रंग में ऐसे रंग जाओ कि दुनिया का कोई रंग चढ़े ही नहीं।"
🙏 राधा वल्लभ लाल की जय 🙏