गणतंत्र दिवस भाषण
“मैं इस हिंदुस्तान की हिफ़ाज़त करूँगा,
ये हिंदुस्तान मेरी जान है।
इसकी रक्षा के लिए
मेरा दिल भी और मेरी जान भी कुर्बान है।”
माननीय मुख्य अतिथि महोदय,
आदरणीय शिक्षकगण,
एवं मेरे प्यारे भाइयों और बहनों—
आप सभी को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आज 26 जनवरी 2026 का पावन दिन है, जिसे हम सभी 77वें गणतंत्र दिवस के रूप में मना रहे हैं। यह दिन हमारे देश के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि 26 जनवरी 1950 को हमारे देश में लिखित संविधान लागू हुआ था और भारत एक संपूर्ण गणराज्य बना।
इस महान संविधान के निर्माण में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी का अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने ऐसा संविधान बनाया, जो समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित है। यह संविधान धर्म, जाति, लिंग और वर्ग के भेदभाव को नकारते हुए हर नागरिक को समान अधिकार देता है।
डॉ. अंबेडकर जी ने दलितों के साथ होने वाले सामाजिक अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया और संविधान के माध्यम से श्रमिकों, किसानों तथा महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित किया। वे केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के महान योद्धा और नए भारत के शिल्पकार थे।
आज के इस पावन अवसर पर हम सभी का यह कर्तव्य है कि हम संविधान में निहित मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएँ और एक न्यायपूर्ण, समतामूलक और सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।
आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपने हिंदुस्तान की एकता, अखंडता और संविधान की मर्यादा की रक्षा करेंगे।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।
जय हिंद 🇮🇳
जय भारत 🇮🇳
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