🙏 हमने दुनीया से मोहब्त की। मगर दुनीया ने हमे नंफड़त के सिबा कुछ और ना किय। जौ हमे छोर के चले गए वह फिर बापस नही आएगे। पतझड़ मे जो फुल मुड़झा जाते हैं । वह बापस कभी खिलते नही । तुम वह फुल हो जौ मेरे दिल के बागीचे खिला करती थी। ना जाने किस पंतझड़ की नंजर लग गई,तुम मेरे दिल के बागीचे मे मुड़झा गई। #💔दर्द भरी कहानियां#👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️♂️#📖जीवन का लक्ष्य🤔#📗प्रेरक पुस्तकें📘#📓 हिंदी साहित्य
लेखक/Writer
शक्ति मंडल..