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mukesh kumar
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दुरबल को न सताइये, जाकी मोटी हाय। मुई खाल की सांस से, सार भसम होई जाय।। कबीर कहते हैं कि दुर्बल को मत सताओ, उसकी हाय बहुत ही मोटी होती है यानी उसकी ‘हाय’ तुम्हें लग जायेगी जैसे मरी खाल की सांस से यानी चमड़े की धौकनी से लोहा जैसी कठोर धातु भी भस्म हो जाती है। कहने का भाव है कि दुर्बल की हाय मत लो। वह कमजोर है, पर उसकी ‘हाय’ कमजोर नहीं है। #🖋️ कबीर दास जी के दोहे
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