Nitin Lath
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13 days ago
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माँ शैलपुत्री देवी दुर्गा का पहला स्वरूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के पहले दिन की जाती है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है, इसलिए इनका नाम “शैलपुत्री” पड़ा (शैल = पर्वत, पुत्री = बेटी)। 🌸 माँ शैलपुत्री का परिचय माँ शैलपुत्री, दुर्गा का प्रथम रूप हैं। इनका वाहन बैल (नंदी) है। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल होता है। ये शांत, सौम्य और शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। 📖 पौराणिक कथा माँ शैलपुत्री का पूर्व जन्म सती के रूप में हुआ था, जो भगवान शिव की पत्नी थीं। जब उनके पिता दक्ष प्रजापति ने शिवजी का अपमान किया, तो सती ने यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए। अगले जन्म में वे हिमालय के घर जन्मीं और शैलपुत्री कहलायीं। बाद में उन्होंने फिर से शिवजी को पति रूप में प्राप्त किया। 🙏 पूजा का महत्व नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में स्थिरता, शक्ति और आत्मविश्वास आता है। यह पूजा व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा देती है। इनकी आराधना से कुंडली के मूलाधार चक्र को जागृत माना जाता है। 🌼 पूजा विधि (संक्षेप में) सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। माँ की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएं। फूल, फल और भोग अर्पित करें। “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” मंत्र का जाप करें। 🎨 माँ शैलपुत्री का स्वरूप माथे पर चंद्रमा सफेद वस्त्र धारण बैल पर सवार त्रिशूल और कमल धारण ✨ विशेष तथ्य माँ शैलपुत्री को शक्ति का आधार माना जाता है। नवरात्रि की शुरुआत इन्हीं की पूजा से होती है। यह रूप धैर्य और साहस का प्रतीक है। #WISHES