🙏 Jai Ma Mahakali 🙏
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एक समय की बात है, एक गरीब लकड़हारा जंगल के पास रहता था। वह रोज़ सुबह अपनी कुल्हाड़ी लेकर जंगल जाता और पेड़ काटकर अपने परिवार का पेट पालता था। उसके पास न धन था, न कोई सहारा, बस मेहनत और सच्चाई ही उसका धन थी। एक दिन पेड़ काटते समय अचानक उसकी लोहे की कुल्हाड़ी फिसलकर नदी में गिर गई। लकड़हारा घबरा गया और नदी किनारे बैठकर रोने लगा। वह जानता था कि कुल्हाड़ी के बिना उसका जीवन रुक जाएगा। उसकी सच्ची पुकार सुनकर माँ काली प्रकट हुईं। उनका स्वरूप भयानक था, पर हृदय करुणा से भरा हुआ। माँ काली ने पहले सोने की कुल्हाड़ी निकाली और पूछा, “क्या यह तुम्हारी है?” लकड़हारे ने हाथ जोड़कर कहा, “नहीं माँ, मैं इतना धनवान नहीं हूँ।” फिर माँ ने चाँदी की कुल्हाड़ी दिखाई, पर उसने वही उत्तर दिया। अंत में माँ काली ने लोहे की कुल्हाड़ी दिखाई, जिसे देखकर लकड़हारा बोला, “हाँ माँ, यही मेरी है।” उसकी सच्चाई और ईमानदारी से प्रसन्न होकर माँ काली ने उसे तीनों कुल्हाड़ियाँ दे दीं और कहा, “जो सत्य के मार्ग पर चलता है, उसकी रक्षा मैं स्वयं करती हूँ।” उस दिन लकड़हारा समझ गया कि सच्ची भक्ति, मेहनत और ईमानदारी से माँ काली की कृपा अवश्य मिलती है। जय माँ काली। #❤️जीवन की सीख #🕉️सनातन धर्म🚩 #👍 डर के आगे जीत👌 #🌙 गुड नाईट