#हरिद्वार_की_खबरें

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1940-50 के दशक में, जब लकड़ी सस्ती होने के कारण केरोसिन की मांग कम थी, तब बर्मा शेल (Burmah-Shell) कंपनी ने अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध गायक मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ में रेडियो पर विज्ञापन गीत जारी किए थे। रफ़ी साहब द्वारा गाया गया यह विज्ञापन गीत, जिसमें "बर्मा शेल का तेल" का ज़िक्र था, उस दौर की एक अनोखी मार्केटिंग रणनीति थी। 

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बर्मा शेल केरोसिन के बारे में प्रमुख तथ्य:
ऐतिहासिक विज्ञापन: 1940 और 50 के दशक में, बर्मा शेल कंपनी के केरोसिन को बढ़ावा देने के लिए मोहम्मद रफ़ी ने रेडियो विज्ञापन गीत (Jingle) गाए थे, जो घर-घर में लोकप्रिय हुए।
उद्देश्य: उस समय लोग खाना पकाने के लिए लकड़ी (firewood) को प्राथमिकता देते थे, जो केरोसिन की तुलना में सस्ती थी। इसलिए बर्मा शेल को केरोसिन बेचने के लिए विज्ञापन का सहारा लेना पड़ा।
केरोसिन का नाम: उस समय केरोसिन के तेल को आमतौर पर "घासलेट" (Ghaslet) भी कहा जाता था।
कंपनी का इतिहास: 1928 में भारत में स्थापित, बर्मा-शेल तेल कंपनी भारत में केरोसिन और पेट्रोलियम उत्पादों का एक प्रमुख वितरक थी।
भारत पेट्रोलियम में विलय: 24 जनवरी 1976 को, बर्मा शेल समूह को भारत सरकार द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया और बाद में इसे भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के रूप में जाना जाने लगा। 

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यह विज्ञापन उस समय की रेडियो-केंद्रित मार्केटिंग और भारत में केरोसिन के उपयोग को बढ़ावा देने की एक दुर्लभ ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे आज भी याद किया जाता है।