*दया धर्म का मूल है,पाप मूल अभिमान।*
*तुलसी दया न छोड़िए,जब लग घट में प्राण॥”*
दया ही धर्म की जड़ है और अभिमान पाप की जड़ है,जबतक शरीर में प्राण हैं तबतक मनुष्य को दया नहीं छोड़नी चाहिए अर्थात जीवन में करुणा और नम्रता बनाए रखना ही सच्चा धर्म है।
🪷🪷 *जय श्रीकृष्ण* 🪷🪷
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