शहर के बीचों-बीच बने पुराने होटल आर्या में ठहरते समय अर्जुन को अंदाज़ा भी नहीं था कि यह रात उसकी ज़िंदगी की आखिरी रात बन सकती है। वह एक फ्रीलांस पत्रकार था और एक रहस्यमयी गुमशुदगी की जांच करने आया था, जिसमें आखिरी सुराग इसी होटल के कमरा नंबर 307 से जुड़ा था, इसलिए उसने जानबूझकर उसके बगल वाला कमरा लिया। रात करीब बारह बजे दीवार के उस पार से घसीटने जैसी आवाज़ें आने लगीं, फिर अचानक तीन तेज धमाके हुए, जैसे किसी ने दीवार पीटी हो, और उसकी जिज्ञासा डर पर भारी पड़ गई। वह बाहर निकला तो देखा 307 का दरवाज़ा आधा खुला है, अंदर अंधेरा और ठंडी हवा, फर्श पर घसीटने के निशान सीधे अलमारी तक जा रहे थे, जिसे खोलने पर उसे नीचे
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