#📚कविता-कहानी संग्रह #जय माँ भारती जय माता दी
हिन्दी कविता: #कवि लिखे तो क्या लिखें
आज के दौर में कवि लिखे तो क्या लिखें ना रिश्तो का मान बचा है
ना अपनों का सम्मान बचा है
ना कहीं कोई आए जाए
ना कोई किसी को कहीं बुलाए,,,,,
अपने में ही सभी है खोए
आंखें खुली है पर सभी है सोए
ना आस है ना एहसास है
ना कोई किसी के साथ है,
आज के इस हालात पर
कवि लिखे तो क्या लिखें,,,,,
अब लालच और स्वार्थ बचा हैं
नहीं कही परमार्थ बचा हैं,
जन सेवा का भाव नहीं है
अपनेपन की छांव नहीं है,
एसे में मन होता व्यथित है
कवि लिखे तो क्या लिखें,,,,,,
कवि: रमेश हरीशंकर तिवारी
( रसिक भारती ) #मुम्बईकर