बालु राम कुमावत "गौपाल"
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यूयं गावो मेदयथा कृशं चिदश्रीरं चित् कृणुथा सुप्रतीकम्। भद्रं गृहं कृणुथ भद्रवाचो बृहद्वो वय उच्यते सभासु।। "गौमाता, आप कृश (दुर्बल) शरीर वाले व्यक्ति को हष्ट-पुष्ट कर देती हो एंव तेजोहीन को सुन्दर बना देती हो, आप माँ शब्द की हुंकार से हमारे घरों को मंगलमय बना देती हो, इन्हीं दिव्य गुणों से सभाओं में आपके ही महान यश का गान होता है।" #गौमहिमा