जब श्री कृष्ण शांति दूत बनकर हस्तिनापुर गए, तो दुर्योधन ने उनके स्वागत में छप्पन भोग और कीमती मेवे परोसे थे। लेकिन दुर्योधन के मन में अहंकार था और वह कृष्ण को अपनी संपत्ति से प्रभावित करना चाहता था। भगवान ने उसके राजसी भोजन को ठुकरा दिया क्योंकि उसमें प्रेम की कमी थी। भगवान वहां से सीधे अपने परम भक्त महात्मा विदुर के घर चले गए। विदुर जी एक साधारण जीवन जीते थे। विदुरानी जी अपने आराध्य को सामने पाकर इतनी भावविभोर (सुध-बुध खो देना) हो गईं कि उन्हें होश ही नहीं रहा। प्रेम के अतिरेक में वे कृष्ण को केले का गूदा छीलकर फेंकने लगीं और अनजाने में उन्हें केले के छिलके खिलाने लगीं। भगवान कृष्ण ने भी उनके प्रेम का मान रखने के लिए उन छिलकों को ऐसे खाया जैसे वे संसार के सबसे स्वादिष्ट पकवान हों।
भाव यह है: भगवान को वस्तु की शुद्धता या उसकी कीमत से मतलब नहीं है, वे केवल भक्त के हृदय का भाव देखते हैं।
#📜 Whatsapp स्टेटस #🤟 सुपर स्टेटस