"दिल-ए-बेकरार"
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दिल के इस दाग का,
गहराइयों से हिस्सा है!
आजकल जिंदगी में,
अपना भी एक किस्सा है!
आदमी अकेला होकर,
भला क्या गुल खिलाएगा!
बगैर फूलों के भार के,
काँटा कहाँ पेड़ों पे मुस्कुरायेगा!
भला इश्क-ए-आग को,
कोई सागर क्या आजमाएगा!
यूँ कहीं चूड़ियाँ खनकेंगी तब,
पायल ही संग प्यास बुझाएगा!
मौशम के फूलों की खूशबू,
भर जाती हैं इन आंखों में....
फिर उतर कर यूँ जेहन में,
दिल को करते हैं बेकरार!
अपना दिल एक आईना है,
बस तुम्ही को देखे बार-बार!
जबतक देखे ना चैन नही,
जो देख ले तो....
फिर मीले दिल को करार!💕💞
.....✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
#🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #💝 शायराना इश्क़ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️